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« Reply #1 on: November 15, 2009, 08:35:45 PM » |
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चंडीगढ़कार का वजन मोटरसाइकिल से भी कम, जो एक लीटर में दौड़ सकती है 160 किलोमीटर। इस कार को तैयार किया है चितकारा इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के विद्यार्थियों ने। 13 विद्यार्थियों द्वारा बनाई गई ?स्टील्थ सुपर माइलेज? कार कैलिफोर्निया में 15 से 18 अप्रैल तक शेल इको मैराथन में हिस्सा लेगी।
चितकारा के विद्यार्थियों ने इंडस्ट्रियल एरिया फेज-2 में किराए पर जगह लेकर अगस्त 2008 में इस कार पर काम शुरू किया। एक सीटर, तीन टायरों वाली इस कार के लिए 150 सीसी मोटरसाइकिल के इंजन को 125 सीसी का बनाया गया।
इंजन का सिलेंडर और पिस्टन छोटा करने के साथ ही सिलेंडर का डायामीटर भी छोटा किया गया। कार का वजन हल्का रखने के लिए फाइबर की बॉडी और एल्यूमिनियम की चेसी बनाई गई। इससे कार का वजन 90 किलो तक आ गया।
हवा का दबाव कम से कम करने के लिए कार को एयरोडायनेमिक शेप दी गई। इसके बाद शहर की विभिन्न सड़कों पर इस कार की टेस्टिंग की गई। नतीजा आया एक लीटर पेट्रोल में 160 किलोमीटर की माइलेज। चितकारा के विद्यार्थी सिद्धार्थ के मुताबिक, स्टील्थ को बनाने में 1.55 लाख रुपए का खर्च आया।
यह खर्च चितकारा कॉलेज और भारत पेट्रोलियम ने मिलकर उठाया। यह कार सोमवार को दिल्ली से हवाई जहाज के जरिए कैलिफोर्निया पहुंचेगी। चितकारा के विद्यार्थियों का समूह 9 अप्रैल को रवाना होगा। चितकारा यूनिवर्सिटी के चांसलर अशोक चितकारा कहते हैं, हमने विद्यार्थियों को पूरा सहयोग दिया।
कैलिफोर्निया में सिर्फ हम ही देश का प्रतिनिधित्व करेंगे।
1939 में हुई मैराथन की शुरुआत:
जर्मनी में कारों के इंजन पर कई प्रयोगों के बाद 1939 में शेल इको मैराथन की शुरुआत हुई। बाद में इंग्लैंड और अमेरिका में भी कंपीटिशन शुरू हो गए। मैराथन का मकसद ऐसे ऑटोमोबाइल इंजीनियर तैयार करना है, जो बेहतरीन माइलेज की कार तैयार कर सकें।
कैलिफोर्निया में कार में 250 एमएल पेट्रोल डालकर इसे ट्रैक पर दौड़ाया जाएगा, फिर एक लीटर के हिसाब से अनुपात निकाला जाएगा। कंपीटीशन में कारों को डिजाइन, टेक्निकल इनोवेशन, कॉस्ट एंड मार्केटिंग, सेफ्टी, इकोफ्रेंडली पैमाने पर परखा जाएगा।
स्टील्थ की टीम:
?स्टील्थ सुपर माइलेज? को तैयार किया है, सिद्धार्थ बहूजा, अंकित खुराना, समक्ष चड्ढा, अमित, मनीष, अभिमन्यु, आयुष, राघव, अनिरुद्ध, साहिल, जुबिन, जसकरण और कुलजीत सिंह ने।
यह सभी मैकेनिकल और इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग के विद्यार्थी हैं। इन विद्यार्थियों का कहना है कि कार के जरिए उनका सपना आसमान छूने का है। इसीलिए कार को नीला रंग दिया है।
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